संत लहरी सिंह कश्यप जी की चौथी पुण्यतिथि : प्रतिज्ञा दिवस के रूप में मनाई गई
12 अक्टूबर 2017 का दिन लहरीपुर (जनपद शामली, उत्तर प्रदेश) के इतिहास में एक प्रेरणादायी दिवस के रूप में दर्ज है। इस दिन गाँव के संस्थापक, समाज सुधारक और शिक्षा-समता के प्रतीक संत लहरी सिंह कश्यप जी की चौथी पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और एकजुटता के साथ “प्रतिज्ञा दिवस” के रूप में मनाई गई।
लहरीपुर गाँव, जो संत लहरी सिंह कश्यप जी की दूरदर्शिता, परिश्रम और समाज-निष्ठा का सजीव उदाहरण है, इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं, अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मंच के पदाधिकारियों से खचाखच भरा हुआ था। यह केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि संकल्प और सामाजिक चेतना का संगम था।
कार्यक्रम की शुरुआत — श्रद्धांजलि और संकल्प
सुबह से ही श्रद्धालु और अनुयायी गाँव के प्रमुख स्थल पर एकत्रित होने लगे। संत जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद सामूहिक रूप से सभी ने सिर झुकाकर मौन श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन के आदर्शों को आत्मसात करने की प्रतिज्ञा दोहराई। मंच संचालन के दौरान वक्ताओं ने संत लहरी सिंह कश्यप जी के जीवन दर्शन और उनके समाज सुधार संबंधी कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संत जी का उद्देश्य केवल एक गाँव बसाना नहीं था, बल्कि एक ऐसी चेतना का निर्माण करना था जिसमें शिक्षा, समानता और आत्मनिर्भरता की भावना केंद्र में हो।
मुख्य अतिथि और गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस अवसर पर कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से अनेक समाजसेवी, कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित हुए।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री श्री किरणपाल कश्यप उपस्थित रहे। उन्होंने संत लहरी सिंह कश्यप जी के जीवन दर्शन को “समानता का मार्गदर्शक” बताते हुए कहा —“संत लहरी सिंह कश्यप जी ने जो विचार दिए, वे केवल कश्यप समाज के नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। आज समाज में शिक्षा और एकता की ज्योति जलाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।”कार्यक्रम में श्री गुरचरण सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष – अखिल भारतीय कश्यप निषाद मल्लाह विकास मंच, ने संगठन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संत जी ने अपने जीवनकाल में जो कार्य किए, वे आज भी समाज के हर वर्ग को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा —“लहरीपुर केवल एक गाँव नहीं, बल्कि वह विचारभूमि है जहाँ से समाज सुधार की क्रांति प्रारंभ हुई थी।”
इसके साथ ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री बी. एल. मेहरा और राष्ट्रीय मंत्री श्री सुखबीर सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर समाज में शिक्षा और जागरूकता फैलाने की अपील की।चौधरी भोपालसिंह ने युवाओं का आह्वान किया
देश के विभिन्न राज्यों से पहुँचे अनुयायी
इस अवसर पर केवल शामली जनपद ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा से भी मंच के कार्यकर्ता, अनुयायी और पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।
सभी ने एक स्वर में संत लहरी सिंह कश्यप जी के दिखाए मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा दोहराई।
यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायी था जब सैकड़ों लोग एक साथ खड़े होकर बोले —
“हम समाज में समानता, शिक्षा और एकता का प्रकाश फैलाएँगे, और मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।”
यह प्रतिज्ञा केवल शब्दों की नहीं, बल्कि संघर्ष और समर्पण की भावना से भरी हुई थी।
संत लहरी सिंह कश्यप जी की विचारधारा
संत लहरी सिंह कश्यप जी ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के उत्थान और शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अज्ञानता ही समाज की सबसे बड़ी जंजीर है। उन्होंने हमेशा कहा कि “जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा, तब तक वह सशक्त नहीं हो सकता।”
लहरीपुर गाँव की स्थापना उन्होंने इस उद्देश्य से की थी कि यह गाँव शिक्षा, श्रम और समानता का केंद्र बने।
उन्होंने लोगों को जाति, धर्म या भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे की सहायता करने का संदेश दिया।
उनकी प्रेरणा से लहरीपुर में शिक्षा, कृषि और सामाजिक सहयोग के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य हुए। गाँव आज भी उनके आदर्शों की सजीव मिसाल है।
कार्यक्रम का वातावरण और जनसहभागिता
पुण्यतिथि कार्यक्रम में मंच सुसज्जित था, जिसमें संत जी के जीवन चित्र प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम के दौरान भजन, विचार गोष्ठी और सामाजिक प्रतिज्ञा का आयोजन हुआ।
कई वक्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संत लहरी सिंह कश्यप जी ने किस प्रकार जीवन भर निःस्वार्थ भाव से कार्य किए।
स्थानीय लोगों ने कार्यक्रम की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई। महिलाओं और युवाओं ने भी बड़े उत्साह से भाग लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित अनुयायियों ने कहा कि “यह दिवस हमें हर वर्ष यह याद दिलाता है कि हमारी पहचान हमारे कर्म और शिक्षा से बनती है।”
प्रतिज्ञा दिवस का महत्व
12 अक्टूबर को “प्रतिज्ञा दिवस” के रूप में मनाने की परंपरा समाज में एक नई चेतना लाती है।
इस दिन लोग यह संकल्प लेते हैं कि वे समाज में भेदभाव, अंधविश्वास और असमानता के खिलाफ आवाज़ उठाएँगे।
संत लहरी सिंह कश्यप जी के विचारों पर आधारित यह दिवस अब केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का प्रतीक बन चुका है।
अंतिम चरण — आभार और समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। सामूहिक रूप से फिर से प्रतिज्ञा दोहराई गई कि
“हम संत लहरी सिंह कश्यप जी के विचारों को हर गाँव, हर घर तक पहुँचाएँगे और शिक्षा, समानता, एकता के उनके संदेश को जन-जन तक फैलाएँगे।”
कार्यक्रम का समापन पुष्पांजलि और भजन-कीर्तन के साथ हुआ। सभी श्रद्धालु और कार्यकर्ता संत जी की प्रतिमा के समक्ष नतमस्तक होकर अपने भीतर एक नई ऊर्जा और प्रेरणा लेकर लौटे।
सारांश
संत लहरी सिंह कश्यप जी की चौथी पुण्यतिथि “प्रतिज्ञा दिवस” के रूप में न केवल एक स्मरण दिवस थी, बल्कि यह नए समाज निर्माण का आह्वान थी।
लहरीपुर की धरती ने उस दिन फिर से वही संदेश दिया जो संत जी ने जीवन भर दिया था —
“शिक्षा ही मुक्ति का मार्ग है, और एकता ही समाज की शक्ति।”
स्थान: लहरीपुर, जनपद शामली
तिथि: 12 अक्टूबर 2017
अवसर: चौथी पुण्यतिथि — प्रतिज्ञा दिवस
मुख्य अतिथि:
पूर्व मंत्री श्री किरणपाल कश्यप
श्री गुरचरण सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष — अखिल भारतीय कश्यप निषाद मल्लाह विकास मंच
श्री बी. एल. मेहरा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
श्री सुखबीर सिंह, राष्ट्रीय मंत्री
प्रतिनिधित्व: पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा सहित विभिन्न राज्यों के कार्यकर्ता और अनुयायी
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