शनिवार, 11 नवंबर 2023

हमे अपनी श्रद्धा के चुनाव प्रति सजग रहना चाहिए -लहरीसिंह कश्यप


जहां पर  हमारी भावनाएं गहराई से जुड़ी हुई हो, जिन चीजों के प्रति हमारे मन में गहरी आस्था एवं विश्वास हो तथा उनके प्रति हमारी रुचि रहती हो, वही श्रद्धा होती है। श्रद्धा एक तरह से हमारे व्यक्तित्व का आधार है वह हमारी भावनाओं का केंद्र भी है क्योंकि इसी के इर्द-गिर्द हमारा जीवन संचालित होता है। हम अपनी श्रद्धा के अनुरूप ही किसी भी चीज के प्रति अपनी रुचि- झुकाव प्रदर्शित करते हैं। श्रद्धा के अनुसार ही हमारी चिंतन शैली और विचार बनते- बिगड़ते रहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हमारी प्रवृत्ति व्यवहार आहार- विहार हमारी श्रद्धा के अनुसार ही होते हैं। श्रद्धा किसी भी चीज के प्रति हो सकती है, इसके बल पर ही हम उसे क्षेत्र में लगातार बढ़ते रहते हैं, अभ्यास करने से यह श्रद्धा बढ़ती है और अभ्यास के दौरान यदि किसी भी प्रकार का इससे लाभ मिलता है, तो हमारी श्रद्धा और भी गहरी हो जाती है, वहीं लगातार किसी भी प्रकार की हानि से हमारी श्रद्धा घटती रहती है इसीलिए जो नृत्य एवं गायन के प्रति श्रद्धा रखते हैं, वह भांति-भांति से नृत्य करना सीखते  हैं उसमें अपनी महारत भी हासिल करते हैं, यदि किसी व्यक्ति की रुचि व्यसनों के प्रति होती है, तो वही कड़वी और बदबूदार चीजे उसे अत्यंत प्रिय लगने लगती है।
      कहने का तात्पर्य यह है कि श्रद्धा के अनुसार ही व्यक्ति अपने लिए कार्यक्षेत्र का चुनाव करता है, यदि उसकी श्रद्धा अच्छी चीजों के प्रति है, तो उसका व्यक्तित्व सुविक्षित होता है यदि उसकी श्रद्धा बुरी चीजों के प्रति है तो उसका व्यक्तित्व विकृत होता है। अच्छी चीजों के प्रति रुचि होने के कारण व्यक्ति अपने जीवन में पुण्य संपदा अर्जित करता है। बुरी चीजों या निम्न कोटि की चीजों के प्रति श्रद्धा होने से व्यक्ति अपने जीवन में पाप संपदा अर्जित करता है। इसीलिए हमें अपनी श्रद्धा के चुनाव के प्रति बड़ा सजग रहना चाहिए जिससे हम समाज के लिए एक उदाहरण भी बन सके तभी हमारा जीवन सार्थक हो सकता है। 
                    लहरीसिंह कश्यप ,लहरीपुर ,शामली ।

मंगलवार, 7 नवंबर 2023

लहरीपुर में है ग्राम देवता


गाँव लहरीपुर  ये ग्राम देवता (,भूमिया खेड़ा) का  देवस्थान है जिसका निर्माण 1972 में हुआ था जो इसके मुख्य द्वार पर उकेरा हुआ है । 1968 में गाँव लहरीपुर बसने के बाद 1972 में यहाँ के वासियो ने इसे स्थापित  किया था जो उसी समय से यथा स्थिति बना हुआ है । और सुरक्षित है । #लहरीपुर #लहरी_सिंह

सोमवार, 6 नवंबर 2023

आरक्षण विषय पर प्रथम न्यायिक निर्णय, प्रथम संविधान संसोधन: डॉ जी सिंह कश्यप


आरक्षण विषय पर प्रथम न्यायिक निर्णय, प्रथम संविधान  संसोधन
 संशोधन   (मद्रास राज्य बनाम चम्मापकम दोराइराजन ए आई आर 1951 ए .सी .पेज- 226)
     भारतीय संविधान के भावनाओं के विरोध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 9-4 -1951 को अपने फैसले में संविधान निर्माताओं की भावनाओं के विरुद्ध निर्णय दिया ।भारत का संविधान 26 -01-1950 को लागू हुआ। तमिलनाडु राज्य की सरकार ने संविधान के अनुच्छेद -46 के तहत सांप्रदायिक सामान्य आदेश नंबर (Communal G.O No-2208 Dated-16-06-1950 )दिनाकित -16-06-1950 के माध्यम से मेडिकल कॉलेज एवं इंजीनियरिंग कॉलेज में आरक्षण की व्यवस्था किया| इस आरक्षण व्यवस्था में प्रत्येक 14 सीट में गैर हिंदू ब्राह्मण 6 सीट, पिछड़ा हिंदू 2 सीट ,ब्राम्हण 2 सीट ,हरिजन 2 सीट ,ईसाई एवं मुसलमान 1-1 सीट की शिक्षा में आरक्षण दिया |जिससे श्रीमती चंपकम दोराइराजन का मेडिकल कॉलेज में तथा सी .आर .श्रीनिवासन को इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश नहीं हो पाया |इसलिए ये दोनों भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मद्रास हाई कोर्ट में मुकदमा करके Communal G.O आदेश की वैधता को चुनौती दिए और याचिका में कहा कि यदि आरक्षण व्यवस्था नहीं की गई होती तो हम लोगों का प्रवेश हो गया होता ।क्योंकि जिन लोगों का प्रवेश हुआ है ,उन लोगों से हम लोगों का नंबर अधिक है ।विद्यालय में प्रवेश न मिलने से हम लोगों के मूलधिकार का हनन हुआ है ।भारत के संविधान के अनुच्छेद 15 (1)में कहा गया है कि --- "राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म ,मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म ,स्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।" तथा भारत के संविधान के अनुच्छेद 29( दो) में कहा है कि--- " राज्य द्वारा पोषित राज्य-निधि से सहायता पाने वाली किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म ,मूल वंश ,जाति ,भाषा या इनमें से इसी के आधार पर वंचित नहीं किया जायेगा ।"लेकिन मद्रास राज्य में जाति और धर्म के आधार पर विभेद किया है।इसलिए यह Communal G.O दिनांकित-16-06-1950 अवैध है। मद्रास हाई कोर्ट ने इनके तर्कों से सहमत होते हुए उस आदेश को अवैध घोषित कर दिया जबकि मद्रास सरकार ने शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 46 के तहत किया था ।
संविधान के अनुच्छेद 46 के अनुसार --"अनुसूचित जातियों ,अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्ग के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों अभिवृध्दि ---राज्य जनता के दुर्बल वर्गों के विशिष्टता ,अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा और अर्थ संबंधित हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा और सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के शोषण से उनकी संरक्षा करेगा ।"
         संविधान में ऐसी व्यवस्था इसलिए किया गया है क्योंकि ब्राह्मण धर्म शास्त्रों में एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी .के साथ जाति और धर्म के आधार पर विभेद किया जाता रहा है ।इसी लिए संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था केवल पिछड़ा वर्ग (एस.सी., एस.टी .,ओ.बी.सी .)के लिए किया ,लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने जातीय पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर संविधान की भावनाओं के विरुद्ध उस शैक्षिक आरक्षण को अवैध कर दिया ।उस समय पेरियार ई. वी .रामास्वामी नायकर जिंदा थे ।उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के निर्णय के विरूद्ध पूरे मद्रास मे जन आन्दोलन शुरू कर दिया।इधर मद्रास सरकार ने इस निर्णय विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट मेअपील दाखिल कर दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सात जजों ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बहाल रखा तथा मद्रास सरकार की अपील खारिज कर दिया और कहा कि य सांप्रदायिक सामान्य आदेश(Communal G.O.) दिनांक 16 -06-1950 संविधान के अनुच्छेद 15 (एक )एवं 29(2) के विरुद्ध है। इसलिए अवैध है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिनांक 3 मार्च 1951 को हो गया जिसको मद्रास राज्य बनाम श्रीमती चंपाकम दोराइराजन एवं अन्य केस नंबर- 270 -271/1951 ए आई आर 1951 सुप्रीम कोर्ट पेज नंबर 226 ,229 के नाम से जाना जाता है ।
    उस समय  पेरियार साहब का आंदोलन रंग लाया और नेहरू सरकार परेशान हो गई । नेहरु सरकार यह नहीं चाहती थी कि दक्षिण भारत का आंदोलन उत्तरी भारत में फैले। यदि ऐसा हो गया तो आरक्षण के बिंदु पर पूरे भारत में यह आग फैल जाएगी ।इसलिए नेहरू जी ने विधि मंत्री बाबा साहब डॉ आंबेडकर के पास जाकर इस  अदालती  निर्णय के निदान का अनुरोध किया ।तब बाबा साहब ने कहा कि निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए संविधान संशोधन करना होगा ।तब जाकर प्रथम संविधान संशोधन करके अनुच्छेद 15( 4 )एवं नौवीं अनुसूची की व्यवस्था की गई ।संशोधन बिल की धारा 2 के तहत अनुच्छेद 15 (4), धारा 14 के तहत नौवीं अनुसूची एवं धारा 5 के तहत अन्य जोड़ा गया ।जो इस प्रकार है---
    अनुच्छेद 15 (4 ) ----"इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29(2) की कोई बात राज्य की सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।"
     इस संविधान संशोधन से सुप्रीम कोर्ट का निर्णय दिनांक 03-04-1951 निष्प्रभावी हो गया।
    अनुच्छेद -31( ख) इस प्रकार है-------
      कुछ अधिनियम और विनिमयमो का विधिमान्य करण---
          " अनुच्छेद-31 (क) में अन्तर्विष्ट उपबंधो की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ,नयी अनुसूची में भी विनिर्दिष्ट अधिनियम और विनियमों में से और उनके उपबंधो मे से कोई इस आधार पर शून्य कभी शून्य हुआ नहीं समझा जाएगा कि वह अधिनियम ,विनियम या उपबंध इस भाग के किन्हीं उपंबंधो द्वारा प्रदत अधिकारों में से किसी से असंगत है या उसे छिनता है या न्यून करता है और न्यायालय अधिकरण के किसी
प्रतिकूल निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी  उक्त अधिनियमो और विनियमो में से प्रत्येक, उसे निरसित या संशोधित करने की सक्षम विधानमंडल की शक्ति के अधीन रहते हुए , प्रवृत्त बना रहेगा ।"
डॉ जी सिंह 
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग एसोसिएशन 9415973984

लहरी सिंह कहते थे कि अपने जीवन को किसी बेहतर काम में समर्पित करना ही जीवन का अंतिम उद्देश्य है -विनोद छत्रा

लहरी सिंह कश्यप जी का दसवाँ स्मृति दिवस दिनाँक 12 अक्टूबर 2023 को  उनके बसाये हुए गाँव लहरीपुर मे मनाया गया जिसमें देशभर से  आये उनके अनुयायी श्रद्धालुओ ने भाग लिया । प्रातः 10 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ देर रात तक चलता रहा ।लहरी सिंह कश्यप जी के विचार दर्शन पर विभिन्न विभिन अनुयायियों ने प्रकाश डाला इसी क्रम में विनोद छत्रा ने उनके जीवन दर्शन पर बोलते हुए कहा कि लहरी सिंह जी हमेशा लोगो को जागरूक करते रहते थे कि  जीवन में हम लगातार कुछ नया, कुछ बेहतर पाने की कोशिश में रहते हैं, और इसी चाहत में  एक दिन जीवन खत्म हो जाएगा। पर प्रश्न आता है  कि आखिर जीवन का अंतिम सत्य क्या है? क्या कुछ ऐसा है जिसे हम पाने की चाहत में जीवन बिता देते हैं, पर मिलता वो तब तब भी नहीं। सवाल है हमारे जीवन का अंतिम उद्देश्य और आखिरी सच क्या है? हम यह कैसे जान पाएंगे। लहरी सिंह कहते थे कि  इस प्रश्न का सीधा और सटीक उत्तर आप जान पायें इसके लिए जरूरी है ईमानदारी से अपनी हालत को समझना, आपके भीतर की सच्चाई को जाने बिना आप अंतिम सत्य या उद्देश्य तक पहुँच नहीं पाएंगे। आइये प्रश्न पर जरा विस्तार से गहन चर्चा करते हैं। जीवन का अंतिम सत्य क्या है?जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है, क्योंकि जन्म लेने के पश्चात पुरुष हो या स्त्री, सज्जन हो या दुर्जन, जानवर हो  या पक्षी जिसने भी प्रकृति की इस धारा में जन्म लिया है उसे एक दिन मिटना ही होगा। परन्तु प्रश्न यह है की जब मौत ही अंतिम सत्य है तो हम जी क्यों रहे हैं? हमें क्या पाना है जिसकी तलाश में हर व्यक्ति दौड़े जा रहा है? हम इतने अज्ञानी हैं की हमें वास्तव में पता ही नहीं है की हमें जीवन में क्या चाहना चाहिए। अक्सर हम किसी वस्तु पर तो किसी इंसान पर दिल लगाए बैठे होते हैं। और उस वस्तु या व्यक्ति के दूर हो जाने या मिट जाने के बाद हम दुखी होकर पछताते हैं। और फिर नई चीज़ और नए इंसान की तलाश में जुट जाते हैं।इस तरह यहाँ सुख और दुःख दोनों ही इंसान को लुभाते हैं, पर प्रश्न आता है कि जीवन की अंतिम इच्छा क्या है? मनुष्य की अंतिम इच्छा शांति पाने की होती है, आप देखिये आपके हर फैसले के पीछे एक चाहत होगी सुकून और शांति पाने की मनुष्य विवाह करता है ताकि उसे जीवन साथी  के साथ ख़ुशी मिले शांति मिले, वो घर बनाता है ताकि चैन से सो सके  वो नौकरी करता है ताकि पैसों का इस्तेमाल कर चीजों को खरीदकार खुश हो सके।
Lahari Singh Kashyap 
इस प्रकार देखा जाए तो हर मनुष्य शांति की खोज में विभिन्न कार्यों को कर रहा है, पर क्या इन कार्यों को करके वास्तव में खुश होता है? नहीं, इस संसार में हम चाहे जो भी वस्तु पा ले, जिस भी इन्सान के साथ सम्बन्ध बना लें ये तय है की कुछ समय बाद उससे मन भर जाता है। यानि जो सूकून जो चैन हमें लगता था उस चीज़ को खरीदकर मिलेगा वो कुछ समय बाद खत्म हो जाता है। तो आखिर जब सब चीजों में सुकून नहीं है तो फिर असली शांति किसमें हैं और हम किसके खातिर जीवन जियें। तो लहरी सिंह कहते थे कि अखिल  जीवन का अंतिम उद्देश्य क्या है?  यहाँ उनका  कहना  था कि अंतिम उद्देश्य कोई मंजिल स्थान नहीं है जहां पहुंचकर हम कहें हमने जीवन में जो पाना था अर्जित कर लिए नहीं। जो व्यक्ति अंतिम उद्देश्य को जानना चाहता है सर्वप्रथम उसके लिए ये समझना आवश्यक है कि वह इस समय क्या कर रहा है? वह अपने दैनिक जीवन में किन कार्यों को करता है? किन लोगों के साथ वार्तालाप करता है? क्या वो लोग उसे अंतिम उद्देश्य तक पहुंचा पायेंगे, यदि नहीं तो फिर वह उनके साथ क्या कर रहा है? क्योंकि ये बात तो तय है दौड़ तो तुम लगाओगे क्योंकि जाना हम सभी को है पर सवाल आता है जिस तरफ हम दौड़ लगा रहे हैं क्या वो स्थान वाजिब है दौड़ लगाने के लिए?
           जिस जगह आप काम कर रहे हैं, जिन लोगों के खातिर आप कार्य कर रहे हैं, जिन जगहों पर आप खुशियाँ मनाकर आते हो क्या वो आपको उस अंतिम इच्छा को पूरी कर रहे हैं? या फिर एक के बाद एक नयी और घटिया इच्छाएं दिमाग में घर बना रही हैं। खुद से पूछिए। तो सवाल है  यह है कि सही काम कैसे चुनें ? जीवन में सही काम करने के बहुत से पैमाने हो सकते हैं कोई भी ऐसा कार्य जिससे व्यक्तिगत रूप से आपको, परिवार को नहीं बल्कि आपके पूरे क्षेत्र, राज्य और देश का भला होता हो। वह सही कर्म कहलायेगा। जीवन के खत्म होने से पहले हमें ऐसे कर्म करने चाहिए जिसमें सिर्फ हमारा स्वार्थ न हो बल्कि दूसरे का कल्याण शामिल होगा। अब आप कहेंगे आपके करने योग्य सही काम क्या है? ऐसे बहुत से काम हो सकते हैं देखिए आसपास कहीं  शिक्षा का अभाव है तो वहां उन्हें सही शिक्षा दीजिए। कहीं पर आपके ही क्षेत्र या राज्य में गंदगी बहुत है तो उसको दूर करने के लिए अभियान चलाइये। भले आपके पास पर्याप्त पैसा ना हो लेकिन अगर आपकी मंशा साफ रहेगी तो लोग आपके साथ आएंगे। और इस तरह धीरे-धीरे आप इस अभियान को सफल बनाएंगे और जरूरी नहीं हमेशा गंदगी बाहरी तौर पर हो कई बार गंदगी हमारे दिमाग में भी बैठी होती तो आप किसी मुद्दे पर लोगों के बीच फैले भ्रम यानि गंदगी को दूर करने का प्रयास कर सकते हैं। यही जीवन का सदुपयोग है की हमने अपने स्वार्थ से ज्यादा अपने जीवन को किसी बेहतर काम में समर्पित कर दिया।

सर्व सम्मति से समाज सुधारक निर्वाण प्राप्त लहरी सिंह कश्यप को संत की उपाधि प्रदान करने पर बनी सहमति

लहरीपुर गाँव बसाने वाले लहरी सिंह कश्यप जी को मिली संत की उपाधि
  राष्ट्रीय सामाजिक न्याय चेतना ट्रस्ट एवं अल्टीमेट ट्रुथ 
यूनिवर्स ट्रस्ट के तत्वाधान में  शामली जनपद में  लहरीपुर गाँव बसाने वाले स्वर्गीय लहरी सिंह कश्यप जी  के दसवें स्मृति दिवस 12 अक्टूबर 2023 के अवसर पर गाँव लहरीपुर  में भारी संख्या में  देश के विभिन्न हिस्सों से लहरी सिंह कश्यप के अनुयायी श्रद्धालु उपस्थित हुए , लगभग 3000 श्रद्धालुओ  ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। सुबह से ही आश्रम में परिवर्तित उनके आवास पर उनकी  वाणी भजन व पूजन आदि का  कार्यक्रम हुआ सुबह 10:00 बजे देश के कोने-कोने से आए उनके अनुयायी श्रद्धालुओं ने खड़े होकर उनके सम्मान में मौन प्रार्थना की तथा  सभी प्रमुख अतिथियों ने उनके चित्र व उनकी विचार संस्कार की मूल गद्दी पर  पुष्प व माल्यार्पण किया तथा उनके अनुयायियों द्वारा लाये हुए  दीपों को सामूहिक रूप से प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
 तत्पश्चात  राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उसे सेल्यूट करते हुए राष्ट्रगान किया गया।  सभी ने खड़े-खड़े सामूहिक रूप से दाहिना हाथ उठाकर सामने करके  संविधान की उद्देशिका की शपथ ग्रहण किया । तदुपरांत  प्रेरणा गीत-" उठें उठें समाज के लिए उठें उठें जगें-जगें स्वराष्ट्र  के लिए जगें-जगें "सामूहिक गान पी० जी०  कॉलेज गाजीपुर के  प्रोफे० ( डॉ०) जी० सिंह कश्यप द्वारा कराया गया। इस अवसर पर " सम्पूर्ण मानवता और राष्ट्र की समस्त समस्याओं के सम्पूर्ण निराकरण हेतु सभी वर्गों में बिखरे हुए नेतृत्व में समन्वय की अनिवार्यता " नामक विषय पर एक राष्ट्रीय वैचारिक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया । विनोद छत्रा ने संगोष्ठी के विषय की प्रस्थापना करते हुए कहा कि मानवता के कल्याण हेतु हर क्षेत्र में सम्पूर्ण समन्वय  परम आवश्यक  है जिसके लिए सभी को  संकल्पित होकर कार्य करने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पी जी कॉलेज गाजीपुर के प्रोफ०(डॉ०) जी० सिंह कश्यप ने विस्तार से संपूर्ण समन्वय के सिद्धांत के मनोवैज्ञानिक, मानसिक,आध्यात्मिक, धार्मिक,व्यावहारिक,वैचारिक,राजनीतिक सामाजिक,भौगोलिक और आर्थिक पक्षों को समझाकर सभी जिज्ञासु प्रश्नों का उत्तर प्रदान करते हुए  सभी विचारधाराओं के लोगों को समन्वय के साथ कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि समन्वय बनाने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है समन्वयपूर्ण  नेतृत्व हेतु शिक्षा बहुत जरूरी है क्योंकि शिक्षा से बुद्धि , बुद्धि से विवेक, विवेक से न्याय, नयाय से निर्णय और  निर्णय से नेतृत्व पैदा होता है ।पूर्व राज्य मंत्री उदयवीर सिंह देशवाल ने लहरी सिंह के जीवन दर्शन  पर  प्रकाश डालते हुए कहा कि लहरी सिंह कश्यप एक सामाजिक न्यायप्रिय  समन्वयवादी  विचारधारा  के धनी व्यक्ति थे उन्होंने समाज के सभी वर्गों के हितों के लिए कार्य किया है आज उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है ।पूर्व एमएलसी एवं विधानसभा  अध्यक्ष श्री सुरेश कश्यप एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री सपना कश्यप ने समन्वय के विचार की सराहना करते हुए  राजनीति समाज धर्म व्यवहार और व्यवसाय में पूर्ण रूप से स्थापित करने के मिशन का भागीदार बनने और सक्रिय भूमिका निभाने  का ऐलान किया। राष्ट्रीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष चौधरी धर्मेंद्र देशवाल ने इसी विचार के आधार पर समाज में बाल्यावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक संस्कार फैलाने के मिशन में शिक्षा,समाज, व्यापार ,धर्म, विज्ञान और व्यवहार को माध्यम बनाकर समन्वय के विचार को मजबूत बनाने के संकल्प में अपनी टीम श्री  मुखिया जगनपुरा और बबलु राणा के साथ अग्रणी भूमिका निभाने का वायदा  किया। राष्ट्रीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सलेक चंद कश्यप   ने  कहा कि लहरी सिंह पाखंडो अंधविश्वासों और बेकार के रीतिरिवाजों के प्रबल विरोधी  और समन्वयवादी विचारो के व्यक्ति थे उन्होंने सर्वसम्मति के निर्णय को दोहराते हुए स्वर्गीय लहरी सिंह कश्यप को संत की उपाधि प्रदान करने के प्रस्ताव पर सहमति प्राप्त किया । राष्ट्रीय संयुक्त किसान मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी राजवीर सिंह मुंडेट ने अपनी टीम के सदस्यों चौधरी योगेंद्र मलिक प्रधान और चौधरी राजपाल सिंह चौहान बलवा व विनोद कुमार के साथ समन्वयवादी  विश्व व्यापक विचार को प्रचारित प्रसारित  और व्यवहार में फलीभूत करने और कराने  के मिशन का अग्रणी भागीदार बनने का संकल्प लिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री बसंत सैनी ने सभी मानव समूहों को परस्पर सम्मानित होकर शिक्षा रोजगार,समाज की सभी आर्थिक और संसाधनात्मक जरूरत को आध्यात्मिक राजनीतिक,सामाजिक और प्रत्येक विषयगत विकास की वास्तविक परिकल्पनाओं को चरम पर पहुंचाने के मिशन में अग्रणी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।  गोष्ठी में कृष्णपाल,राममेहर,डॉ सतीश लांक ,इंदरपाल,रोहताश,चौधरी लोकेन्द्र , आदि ने भी अपना विचार व्यक्त किया संगोष्टि में मुख्य रूप से  संजय कश्यप कंडेला ,दीपक बालान ,महाबीर,किरणपाल,सत्यपाल,राजबीर सिंह,सौरभ,सतीश रोहित, मास्टर जय प्रकाश,रेखा चौहान,नरेंद्र ,संदीप कश्यप अनुज,मोनू,सोनू ,अमरीश, आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, संगोष्टि की अध्यक्षता चौधरी भोपाल सिंह कश्यप ने किया तथा संचालन श्रीमती रेखा चौहान ने किया ।