शनिवार, 19 अक्टूबर 2024

झिंझाना के चैयरमेन श्री सुरेशपाल कश्यप ने लहरीपुर में सुझाये कश्यप समाज मे एकता स्थापित करने हेतु 8 सूत्र


लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी का  11 वा स्मृति दिवस 12 अक्टूबर 2024  बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया कार्यक्रम शुरू करने से पहले प्रेरणा ज्योति यात्रा निकाली गई जिसमे संत लहरी सिंह जी के अनुयायी सम्मलित हुए और यह यात्रा हर वर्ष निकाली जाती है जिसमे एक निश्चित स्थान से ज्योत लेकर कार्यक्रम स्थल पर स्थापित की जाती है । 
 इस अवसर पर अथिति के रूप में बोलते हुए झिंझाना के चैयरमेन श्री सुरेशपाल कश्यप जी ने संत लहरी सिंह जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया और कहा कि  कश्यप समाज में एकता लाने के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता की आवश्यकता है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
1. सामुदायिक संगठन: कश्यप समाज के लोगों को एक मंच पर लाने के लिए संगठनों और समितियों का गठन करना महत्वपूर्ण है। इन संगठनों के माध्यम से लोग एक-दूसरे के साथ संपर्क में रह सकते हैं, आपसी समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं, और समाधान निकाल सकते हैं।
2. शिक्षा और जागरूकता: समाज में शिक्षा का प्रसार करना आवश्यक है ताकि लोग अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो सकें। शिक्षित समाज एकजुट होता है और सामाजिक सुधार के लिए बेहतर प्रयास कर सकता है।
3. साझा कार्यक्रम और उत्सव: विभिन्न त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से समाज के लोगों को एकजुट किया जा सकता है। यह न केवल एकता को बढ़ावा देगा, बल्कि आपसी सहयोग और समझ को भी बढ़ाएगा।
4. सशक्तिकरण के प्रयास: कश्यप समाज के लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए। इसका उद्देश्य रोजगार, शिक्षा, और नेतृत्व के क्षेत्र में विकास करना होना चाहिए।
5. युवा नेतृत्व: समाज के युवाओं को नेतृत्व की भूमिका में लाना चाहिए। जब युवा वर्ग सामाजिक बदलाव में भागीदार बनता है, तो समाज में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है।
6. विभाजन से बचना: समाज में जाति, धर्म, या किसी अन्य प्रकार के विभाजन से बचने के लिए एकता और भाईचारे पर जोर देना चाहिए। आपसी वैमनस्य और प्रतिस्पर्धा से समाज कमजोर होता है, इसलिए सभी को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।
7. विचार-विमर्श और संवाद: समाज के लोगों को अपनी समस्याओं और चिंताओं पर खुलकर चर्चा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। संवाद से गलतफहमियां दूर होती हैं और समाज में एकता बनी रहती है।
8. आदर्श व्यक्तित्व और प्रेरणा: समाज के आदर्श व्यक्तियों और महान नेताओं की जीवन कथाओं को समाज में प्रसारित करना चाहिए, ताकि लोग उनसे प्रेरणा लेकर एकजुट रह सकें और समाज की प्रगति में योगदान दे सकें।
इन प्रयासों से कश्यप समाज में आपसी भाईचारा, सहयोग, और सम्मान बढ़ेगा, जो अंततः समाज की एकता और विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।


फ़ास्ट फ़ूड बन सकता है मानव जीवन के लिए खतरा:डा०रामनिवास कश्यप


 दिनांक 12 अक्टूबर 2024 को लहरीपुर गांव बसाने वाले संत श्री लहरी सिंह कश्यप जी के 11वें स्मृति दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय चेतना ट्रस्ट व अल्टीमेट ट्रुथ यूनिवर्स ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में -"पैक्ड खाद्य एवं पेय पदार्थों में रंग,गंध,स्वाद,परिरक्षक एवं योजक के रूप में प्रयुक्त रसायनों से बच्चों,वयस्कों तथा जीवों के लीवर,हार्ट,ब्रेन,नर्वसिस्टम पित्ताशय ,अग्नाशय,किडनियां,अस्थियां,आंतें,आंखें और शरीर कैसे बचाएं?"-विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा संत लहरी सिंह कश्यप के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। अथिति के रूप में बोलते हुए डाक्टर रामनिवास कश्यप जी ने बोलते हुए कहा कि पैक्ड खाद्य और पेय पदार्थों में उपयोग किए जाने वाले रसायन जैसे रंग, गंध, स्वाद, परिरक्षक, और योजक लंबे समय तक स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं। इनसे लीवर, हार्ट, ब्रेन, नर्वस सिस्टम, पित्ताशय, अग्नाशय, किडनियां, अस्थियां, आंतें, आंखें और शरीर के अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इनसे बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:1. प्राकृतिक और ताजे भोजन का सेवन: ताजे और कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। यह रसायनों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। 2. लेबल को ध्यान से पढ़ें: खाद्य और पेय पदार्थ खरीदते समय उनके लेबल पर लिखी सामग्री को ध्यान से पढ़ें। अगर उसमें सिंथेटिक योजक या परिरक्षक अधिक मात्रा में हैं, तो उसे न खरीदें। 3. ऑर्गेनिक उत्पादों का उपयोग: ऑर्गेनिक उत्पादों में कृत्रिम रसायनों का उपयोग कम होता है, जिससे स्वास्थ्य पर उनका दुष्प्रभाव कम होता है। 4. घर पर भोजन तैयार करें: जितना हो सके, अपने भोजन को घर पर ही तैयार करें, जिससे आप यह सुनिश्चित कर सकें कि उसमें कोई हानिकारक रसायन नहीं है। 5. संतुलित आहार: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लें, जिससे शरीर को इन रसायनों से लड़ने में मदद मिले। 6. पानी की मात्रा बढ़ाएं: पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है। 7. पर्याप्त नींद और व्यायाम: स्वस्थ जीवनशैली से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर होती है, जिससे रसायनों के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। 8. रसायन रहित सफाई उत्पादों का प्रयोग: रसोई और भोजन के संपर्क में आने वाले स्थानों की सफाई के लिए प्राकृतिक या जैविक सफाई उत्पादों का उपयोग करें। 9. नियमित स्वास्थ्य जांच: समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें, जिससे किसी भी अंग पर हो रहे दुष्प्रभावों का पता लगाया जा सके और समय रहते इलाज हो सके।
इन उपायों को अपनाकर आप और आपके परिवार को पैक्ड खाद्य पदार्थों में उपयोग होने वाले हानिकारक रसायनों से बचा सकते हैं।और अंत मे ऐसे महान संत श्री लहरी सिंह कश्यप  जिन्होंने लोगो के सामाजिक आर्थिक,राजनैतिक उत्थान हेतु देश के सभी राज्यो का भर्मण किया तथा सामाजिक लोगो को एकता की राह दिखाई मैं उनसे बहुत बार व्यक्तिगत रूप से भी मिल चुका हूँ वे एक उत्साही सरल ह्रदय वाले व्यक्ति थे उन्होंने जगत कल्याण की भावना से देश के कोने कोने में भर्मण किया तथा लोगो को उपदेश दिया कि इस धरती पर सभी प्राणी एक समान है कोई छोटा बड़ा नही है । वे लोगो को शाकाहार रहने की शिक्षा देते थे उनका मानना था कि सभी जीव ईश्वर की सन्तान है ।वे लोगो को शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा देते थे उनका कहना था कि यदि दुनिया मे क्रांतिकारी परिवर्तन चाहते हो तो शिक्षा का प्रचार प्रसार ज्यादा से ज्यादा करे अशिक्षित व्यक्ति बिना पूँछ और सींग का पशु होता है ।वे बालिका शिक्षा के प्रबल समर्थक थे एक पढ़ी लिखी लड़की दो परिवारों की तरक्की करती है । उनका मानना था कि आत्मिक आध्यात्मिक उन्नत्ति से ही समाज मे भाई चारे की भावना विकसित होती है उनके जीवन पर कबीर दास जी के विचारों का गहरा प्रभाव था । वे अंधविश्वास के घोर विरोधी थे ऐसे महान संत को उनके 11 वे स्मृति दिवस पर कोटि कोटि नमन

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2024

कठिनाइयों का धैर्य पूर्वक सामना करने की प्रेरणा देते थे संत लहरी सिंह कश्यप:योगेंद्र सिंह मालिक

लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी का 11 वाँ स्मृति दिवस 12 अक्टूबर 2024 को उनके पैतृक निवास पर बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया । इस अवसर पर  संत लहरी सिंह जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए  चौधरी योगेंद्र सिंह मालिक  ने कहा कि लहरी सिंह कश्यप जी  एक उच्च कोटि के विचारक थे भले ही उनकी शिक्षा कम है मगर उनके किये गए कार्यो में  महापुरुषों के वे सभी लक्षण झलकते है जो उन्हें साधारण व्यक्तियों से अलग और विशिष्ट बनाते हैं। ये लक्षण उनके जीवन की महानता, सोच और कार्यों में झलकते हैं। महापुरुष न केवल अपने लिए बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। लहरी सिंह जी ने जीवन भर मानवता के कल्याण हेतु कार्य किया है दीन दुखियों की सेवा किया है वे उच्च नैतिक मूल्यों और आदर्शों का जीवन भर पालन करते रहे  हैं। वे सत्य, न्याय और ईमानदारी के मार्ग पर चलते थे और दूसरों को भी इसी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने  अपने स्वार्थों को त्याग कर दूसरों की भलाई के लिए कार्य  किया हैं। उनका जीवन दूसरों की सेवा के लिए  समर्पित रहा है। समाज के कमजोर और पीड़ित लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति रखते थे और उनकी पीड़ा को कम करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। वे साहस और धैर्य की जीती जागती मिशाल थे उनके जीवन मे बहुत सारी कठिन परिस्थितियां आयीं मगर उन कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने  धैर्य और साहस से काम लेते  हुए  सभी चुनौतियों का सामना किया और दूसरों को भी साहस और  धैर्य पूर्वक जीवन यापन करने की प्रेरणा दिया । उनके अंदर एक दूरदर्शिता  का भाव झलकता था वे वर्तमान की चुनौतियों को देखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं को समझ जाते थे  और दीर्घकालिक कल्याण की दिशा में कार्य करते थे । वे  निःस्वार्थ भाव से समाज और मानवता की सेवा में रत रहते थे । उनका उद्देश्य अपने हित से अधिक समाज और देश का कल्याण करना था वे सभी के प्रति समान दृष्टिकोण रखते  थे जाति, धर्म, रंग, लिंग आदि के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को एक समान मानते थे । उनका जीवन केवल भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं था, बल्कि वे आध्यात्मिक ज्ञान और अनुभव से समृद्ध थे । उनका जीवन उच्चतर आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित रहा  है। वे गहरे ज्ञान और विवेक से परिपूर्ण थे उनके विचार और कार्य दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। अपने आचरण और कार्यों के द्वारा लोगों को सिखाते थे  वे वही करते थे जिनका वे उपदेश देते थे और इसी कारण लोग उनके प्रति गहरे सम्मान और श्रद्धा का भाव रखते थे । अपने इन गुणों के कारण समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम रहे है उन्होंने बाल विवाह,दहेज प्रथा,अंध विश्वास,पाखंड,बेकार के रीतिरिवाजों और रूढ़ियों के खिलाफ आंदोलन चलाया था  और उनके विचार और कार्य सदियों तक लोगों को प्रेरित करते रहेंगें आज उनके 11 वे स्मृति दिवस पर उनको सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते है और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते है ।