शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी की जीवन दृष्टि और उनके जीवन का उद्देश्य:प्रोफेसर संदीप कुमार कश्यप

 

लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी की जीवन दृष्टि और उनके जीवन का उद्देश्य

लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी  सिंह कश्यप जी के पाँचवी पुण्यतिथि( स्मृति दिवस) गाँव लहरीपुर मे 12 अक्टूबर 2018 को  मनाया गया इस अवसर पर बोलते हुए प्रोफेसर संदीप कश्यप ने कहा कि कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए   समाननीय अध्यक्ष महोदय जी , मंच पर विराजमान आदरणीय गुरुजनों और मेरे प्रिय साथियो, आज मैं आप सबके समक्ष एक ऐसे समाज सुधारक और संत की जीवन दृष्टि और जीवन उद्देश्य पर अपने विचार रखने आया हूँ, जिनका नाम है – संत लहरी सिंह कश्यप जी। 

परिचय

संत लहरी सिंह जी का जीवन हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जन्म 1938 में  सामान्य परिवार में हुआ, लेकिन विचार असाधारण और क्रांतिकारी थे। वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में चेतना जगाने वाले प्रदीप थे। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि –
“सत्य को अपनाओ, समानता को मानो और शिक्षा को जीवन का आधार बनाओ।”

 जीवन दृष्टि

संत लहरी सिंह कश्यप जी की जीवन दृष्टि पाँच आधारों पर टिकी थी –

  1. सत्य और न्याय –
    उन्होंने कहा कि झूठ और अन्याय पर खड़ा समाज कभी टिक नहीं सकता।
    कबीर दास जी ने भी कहा है –
    “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
    जाके हृदय साँच है, ताके हृदय आप।।”
    संत लहरी सिंह जी का पूरा जीवन इसी सत्य पर आधारित था और अपना जीवन भी इसी आधार पर जिया ।

  2. समानता का संदेश –
    उन्होंने जातिवाद और ऊँच-नीच की प्रथा का विरोध किया।
    महात्मा फुले ने भी कहा था –
    “जाति-पांति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।”
    इसी विचार को संत लहरी सिंह जी ने अपने जीवन में उतारा।

  3. शिक्षा का महत्व –
    उनका विश्वास था कि शिक्षा ही समाज सुधार का असली हथियार है।
    ज्योतिबा फुले ने कहा था –
    “शिक्षा बिना मनुष्य अंधा है।”
    संत लहरी सिंह जी ने यही बात समाज को समझाई और हर वर्ग तक शिक्षा पहुँचाने का प्रयास किया।

  4. अंधविश्वास का विरोध –
    उन्होंने कहा कि समाज को तर्क और विज्ञान के मार्ग पर चलना चाहिए। झाड़-फूँक, तंत्र-मंत्र और ढोंग से मुक्ति ही सच्ची प्रगति है।

  5. आत्मनिर्भरता और संघर्ष –
    वे हमेशा कहते थे – “समस्या हमारी है तो समाधान भी हमें ही खोजना होगा।”
    यह उनकी संघर्षशीलता और आत्मनिर्भरता की पहचान थी।

 जीवन का उद्देश्य

संत लहरी सिंह कश्यप  जी का उद्देश्य केवल अपने लिए जीना नहीं था, बल्कि समाज को नई दिशा देना था। उनके जीवन उद्देश्य को हम इस प्रकार समझ सकते हैं –

  1. समाज को जागरूक करना – अज्ञान दूर करना और अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना।

  2. दलित, पिछड़े और गरीब वर्ग को सम्मान दिलाना – ताकि कोई भी वर्ग शोषण और अन्याय का शिकार न बने।

  3. शिक्षा का प्रसार – हर घर में शिक्षा पहुँचे, यही उनका सपना था।

  4. सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन – जातिवाद, दहेज, बाल विवाह और पाखंड से समाज को मुक्त करना।

  5. मानवता और भाईचारा – सभी धर्मों, जातियों और वर्गों में एकता स्थापित करना।

 प्रसंग और उदाहरण

कहा जाता है कि जब गाँव में कोई व्यक्ति बीमार होता, तो लोग तांत्रिकों के पास जाते। संत लहरी सिंह जी ने उन्हें समझाया –
“बीमारी का इलाज तंत्र-मंत्र से नहीं, दवा और चिकित्सक से होता है।”
इस प्रकार उन्होंने लोगों में वैज्ञानिक सोच का विकास किया। एक बार उन्होंने गाँववालों से कहा –
  “सच्चा संत वह नहीं जो चमत्कार दिखाए, बल्कि वह है जो समाज से अज्ञान और अन्याय मिटाए।”

 आज के संदर्भ में

साथियो, आज भी समाज में कई चुनौतियाँ हैं –

  • जातिवाद अब भी मौजूद है।

  • शिक्षा हर घर तक नहीं पहुँची है।

  • अंधविश्वास और पाखंड अब भी लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। 

ऐसे समय में संत लहरी सिंह जी की शिक्षाएँ हमारे लिए दीपक की तरह हैं।महात्मा गाँधी ने भी कहा था –
“असली धर्म वही है, जो समाज को ऊँचाई पर ले जाए।”
संत लहरी सिंह जी का पूरा जीवन इसी विचार को समर्पित था। 

 और अंत मे प्रिय साथियो, संत लहरी सिंह जी की जीवन दृष्टि सत्य, समानता और शिक्षा पर आधारित थी। उनका जीवन उद्देश्य था – एक जागरूक, अंधविश्वास-मुक्त और समान समाज का निर्माण। यदि हम उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाएँ, तो निश्चित ही एक ऐसा भारत बना सकते हैं जहाँ हर बच्चा शिक्षित हो, हर व्यक्ति समानता का अनुभव करे और हर घर में भाईचारा और मानवता की ज्योति प्रज्वलित हो। आइए, आज हम सब मिलकर यह संकल्प लें –
  “हम सत्य को अपनाएँगे, शिक्षा का प्रचार करेंगे और समाज को अंधविश्वास से मुक्त करेंगे।” इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ।


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