लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी की जीवन दृष्टि और उनके जीवन का उद्देश्य
लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी के पाँचवी पुण्यतिथि( स्मृति दिवस) गाँव लहरीपुर मे 12 अक्टूबर 2018 को मनाया गया इस अवसर पर बोलते हुए प्रोफेसर संदीप कश्यप ने कहा कि कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाननीय अध्यक्ष महोदय जी , मंच पर विराजमान आदरणीय गुरुजनों और मेरे प्रिय साथियो, आज मैं आप सबके समक्ष एक ऐसे समाज सुधारक और संत की जीवन दृष्टि और जीवन उद्देश्य पर अपने विचार रखने आया हूँ, जिनका नाम है – संत लहरी सिंह कश्यप जी।
परिचय
जीवन दृष्टि
संत लहरी सिंह कश्यप जी की जीवन दृष्टि पाँच आधारों पर टिकी थी –
- सत्य और न्याय –उन्होंने कहा कि झूठ और अन्याय पर खड़ा समाज कभी टिक नहीं सकता।कबीर दास जी ने भी कहा है –“साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।जाके हृदय साँच है, ताके हृदय आप।।”संत लहरी सिंह जी का पूरा जीवन इसी सत्य पर आधारित था और अपना जीवन भी इसी आधार पर जिया ।
- समानता का संदेश –उन्होंने जातिवाद और ऊँच-नीच की प्रथा का विरोध किया।महात्मा फुले ने भी कहा था –“जाति-पांति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।”इसी विचार को संत लहरी सिंह जी ने अपने जीवन में उतारा।
- शिक्षा का महत्व –उनका विश्वास था कि शिक्षा ही समाज सुधार का असली हथियार है।ज्योतिबा फुले ने कहा था –“शिक्षा बिना मनुष्य अंधा है।”संत लहरी सिंह जी ने यही बात समाज को समझाई और हर वर्ग तक शिक्षा पहुँचाने का प्रयास किया।
- अंधविश्वास का विरोध –उन्होंने कहा कि समाज को तर्क और विज्ञान के मार्ग पर चलना चाहिए। झाड़-फूँक, तंत्र-मंत्र और ढोंग से मुक्ति ही सच्ची प्रगति है।
- आत्मनिर्भरता और संघर्ष –वे हमेशा कहते थे – “समस्या हमारी है तो समाधान भी हमें ही खोजना होगा।”यह उनकी संघर्षशीलता और आत्मनिर्भरता की पहचान थी।
जीवन का उद्देश्य
संत लहरी सिंह कश्यप जी का उद्देश्य केवल अपने लिए जीना नहीं था, बल्कि समाज को नई दिशा देना था। उनके जीवन उद्देश्य को हम इस प्रकार समझ सकते हैं –
समाज को जागरूक करना – अज्ञान दूर करना और अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना।
दलित, पिछड़े और गरीब वर्ग को सम्मान दिलाना – ताकि कोई भी वर्ग शोषण और अन्याय का शिकार न बने।
शिक्षा का प्रसार – हर घर में शिक्षा पहुँचे, यही उनका सपना था।
सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन – जातिवाद, दहेज, बाल विवाह और पाखंड से समाज को मुक्त करना।
मानवता और भाईचारा – सभी धर्मों, जातियों और वर्गों में एकता स्थापित करना।
प्रसंग और उदाहरण
आज के संदर्भ में
साथियो, आज भी समाज में कई चुनौतियाँ हैं –
जातिवाद अब भी मौजूद है।
शिक्षा हर घर तक नहीं पहुँची है।
अंधविश्वास और पाखंड अब भी लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
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