सोमवार, 6 नवंबर 2023

लहरी सिंह कहते थे कि अपने जीवन को किसी बेहतर काम में समर्पित करना ही जीवन का अंतिम उद्देश्य है -विनोद छत्रा

लहरी सिंह कश्यप जी का दसवाँ स्मृति दिवस दिनाँक 12 अक्टूबर 2023 को  उनके बसाये हुए गाँव लहरीपुर मे मनाया गया जिसमें देशभर से  आये उनके अनुयायी श्रद्धालुओ ने भाग लिया । प्रातः 10 बजे कार्यक्रम शुरू हुआ देर रात तक चलता रहा ।लहरी सिंह कश्यप जी के विचार दर्शन पर विभिन्न विभिन अनुयायियों ने प्रकाश डाला इसी क्रम में विनोद छत्रा ने उनके जीवन दर्शन पर बोलते हुए कहा कि लहरी सिंह जी हमेशा लोगो को जागरूक करते रहते थे कि  जीवन में हम लगातार कुछ नया, कुछ बेहतर पाने की कोशिश में रहते हैं, और इसी चाहत में  एक दिन जीवन खत्म हो जाएगा। पर प्रश्न आता है  कि आखिर जीवन का अंतिम सत्य क्या है? क्या कुछ ऐसा है जिसे हम पाने की चाहत में जीवन बिता देते हैं, पर मिलता वो तब तब भी नहीं। सवाल है हमारे जीवन का अंतिम उद्देश्य और आखिरी सच क्या है? हम यह कैसे जान पाएंगे। लहरी सिंह कहते थे कि  इस प्रश्न का सीधा और सटीक उत्तर आप जान पायें इसके लिए जरूरी है ईमानदारी से अपनी हालत को समझना, आपके भीतर की सच्चाई को जाने बिना आप अंतिम सत्य या उद्देश्य तक पहुँच नहीं पाएंगे। आइये प्रश्न पर जरा विस्तार से गहन चर्चा करते हैं। जीवन का अंतिम सत्य क्या है?जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है, क्योंकि जन्म लेने के पश्चात पुरुष हो या स्त्री, सज्जन हो या दुर्जन, जानवर हो  या पक्षी जिसने भी प्रकृति की इस धारा में जन्म लिया है उसे एक दिन मिटना ही होगा। परन्तु प्रश्न यह है की जब मौत ही अंतिम सत्य है तो हम जी क्यों रहे हैं? हमें क्या पाना है जिसकी तलाश में हर व्यक्ति दौड़े जा रहा है? हम इतने अज्ञानी हैं की हमें वास्तव में पता ही नहीं है की हमें जीवन में क्या चाहना चाहिए। अक्सर हम किसी वस्तु पर तो किसी इंसान पर दिल लगाए बैठे होते हैं। और उस वस्तु या व्यक्ति के दूर हो जाने या मिट जाने के बाद हम दुखी होकर पछताते हैं। और फिर नई चीज़ और नए इंसान की तलाश में जुट जाते हैं।इस तरह यहाँ सुख और दुःख दोनों ही इंसान को लुभाते हैं, पर प्रश्न आता है कि जीवन की अंतिम इच्छा क्या है? मनुष्य की अंतिम इच्छा शांति पाने की होती है, आप देखिये आपके हर फैसले के पीछे एक चाहत होगी सुकून और शांति पाने की मनुष्य विवाह करता है ताकि उसे जीवन साथी  के साथ ख़ुशी मिले शांति मिले, वो घर बनाता है ताकि चैन से सो सके  वो नौकरी करता है ताकि पैसों का इस्तेमाल कर चीजों को खरीदकार खुश हो सके।
Lahari Singh Kashyap 
इस प्रकार देखा जाए तो हर मनुष्य शांति की खोज में विभिन्न कार्यों को कर रहा है, पर क्या इन कार्यों को करके वास्तव में खुश होता है? नहीं, इस संसार में हम चाहे जो भी वस्तु पा ले, जिस भी इन्सान के साथ सम्बन्ध बना लें ये तय है की कुछ समय बाद उससे मन भर जाता है। यानि जो सूकून जो चैन हमें लगता था उस चीज़ को खरीदकर मिलेगा वो कुछ समय बाद खत्म हो जाता है। तो आखिर जब सब चीजों में सुकून नहीं है तो फिर असली शांति किसमें हैं और हम किसके खातिर जीवन जियें। तो लहरी सिंह कहते थे कि अखिल  जीवन का अंतिम उद्देश्य क्या है?  यहाँ उनका  कहना  था कि अंतिम उद्देश्य कोई मंजिल स्थान नहीं है जहां पहुंचकर हम कहें हमने जीवन में जो पाना था अर्जित कर लिए नहीं। जो व्यक्ति अंतिम उद्देश्य को जानना चाहता है सर्वप्रथम उसके लिए ये समझना आवश्यक है कि वह इस समय क्या कर रहा है? वह अपने दैनिक जीवन में किन कार्यों को करता है? किन लोगों के साथ वार्तालाप करता है? क्या वो लोग उसे अंतिम उद्देश्य तक पहुंचा पायेंगे, यदि नहीं तो फिर वह उनके साथ क्या कर रहा है? क्योंकि ये बात तो तय है दौड़ तो तुम लगाओगे क्योंकि जाना हम सभी को है पर सवाल आता है जिस तरफ हम दौड़ लगा रहे हैं क्या वो स्थान वाजिब है दौड़ लगाने के लिए?
           जिस जगह आप काम कर रहे हैं, जिन लोगों के खातिर आप कार्य कर रहे हैं, जिन जगहों पर आप खुशियाँ मनाकर आते हो क्या वो आपको उस अंतिम इच्छा को पूरी कर रहे हैं? या फिर एक के बाद एक नयी और घटिया इच्छाएं दिमाग में घर बना रही हैं। खुद से पूछिए। तो सवाल है  यह है कि सही काम कैसे चुनें ? जीवन में सही काम करने के बहुत से पैमाने हो सकते हैं कोई भी ऐसा कार्य जिससे व्यक्तिगत रूप से आपको, परिवार को नहीं बल्कि आपके पूरे क्षेत्र, राज्य और देश का भला होता हो। वह सही कर्म कहलायेगा। जीवन के खत्म होने से पहले हमें ऐसे कर्म करने चाहिए जिसमें सिर्फ हमारा स्वार्थ न हो बल्कि दूसरे का कल्याण शामिल होगा। अब आप कहेंगे आपके करने योग्य सही काम क्या है? ऐसे बहुत से काम हो सकते हैं देखिए आसपास कहीं  शिक्षा का अभाव है तो वहां उन्हें सही शिक्षा दीजिए। कहीं पर आपके ही क्षेत्र या राज्य में गंदगी बहुत है तो उसको दूर करने के लिए अभियान चलाइये। भले आपके पास पर्याप्त पैसा ना हो लेकिन अगर आपकी मंशा साफ रहेगी तो लोग आपके साथ आएंगे। और इस तरह धीरे-धीरे आप इस अभियान को सफल बनाएंगे और जरूरी नहीं हमेशा गंदगी बाहरी तौर पर हो कई बार गंदगी हमारे दिमाग में भी बैठी होती तो आप किसी मुद्दे पर लोगों के बीच फैले भ्रम यानि गंदगी को दूर करने का प्रयास कर सकते हैं। यही जीवन का सदुपयोग है की हमने अपने स्वार्थ से ज्यादा अपने जीवन को किसी बेहतर काम में समर्पित कर दिया।

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