🌺लहरीपुर गाँव बसाने वाले संत लहरी सिंह कश्यप जी के 12 वें स्मृति दिवस पर 🌺
राष्ट्रीय संगोष्ठी
विषय:-“सामाजिक समन्वय और जगत कल्याण हेतु शिक्षा की आवश्यकता”
परिचय
संत लहरी सिंह कश्यप जी ने अपने जीवनकाल में समाज को अंधविश्वास, पाखंड और भेदभाव से मुक्त करने का अभियान चलाया। उन्होंने सदैव शिक्षा को ही वह साधन माना, जिसके माध्यम से समाज में समानता, जागरूकता बन्धुता लाई जा सकती है।
शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का साधन नहीं है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का आधार है। शिक्षा ही व्यक्ति में विवेक, नैतिकता और सहयोग की भावना जागृत करती है। जब समाज का हर वर्ग शिक्षा से सशक्त होता है, तब समन्वय और एकता का वातावरण निर्मित होता है।
सामाजिक समन्वय का अर्थ है—विविधता में एकता, भिन्न-भिन्न वर्गों और समुदायों का एक-दूसरे के साथ सम्मान और सहयोग के साथ जुड़ना। शिक्षा इस समन्वय का सेतु है, जो जाति, वर्ग और लिंग के भेद को मिटाकर एक समरस समाज की नींव रखती है।
जगत कल्याण की संकल्पना भी शिक्षा के बिना अधूरी है। शिक्षा मानव को न केवल स्वयं के लिए, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण हेतु कर्तव्यनिष्ठ बनाती है। यह हमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय संवेदनाओं का महत्व सिखाती है।
संत लहरी सिंह कश्यप जी का जीवन संदेश है कि शिक्षा को केवल रोजगार का साधन न मानकर, इसे सामाजिक परिवर्तन, समन्वय और विश्व कल्याण का माध्यम बनाया जाए। यही उनके विचारों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
स्थान : संत लहरी सिंह धाम आश्रम लहरीपुर, जनपद-शामली,उत्तर प्रदेश
दिनांक : 12 अक्टूबर 2025
समय : प्रातः 11.00 बजे
आप सभी से सादर निवेदनहै कि संगोष्ठी में सहभागी बनकर इस विचारयात्रा को सार्थक बनाएं। धन्यवाद।
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