संत लहरी सिंह कश्यप जी ने अपने जीवन के अनुभवों और विचारों में समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उनके अनुसार – मनुष्य के भीतर की चेतना का जागरण ही असली उन्नति है। भौतिक सुख-सुविधाएँ अस्थायी हैं, परंतु आत्मिक शांति स्थायी है। समाज में कोई ऊँच-नीच, भेदभाव या जाति-पाँति का भेद नहीं होना चाहिए। सभी मनुष्य एक ही धरती की संतान हैं। मनुष्यो के विचारों में पारदर्शिता होनी चाहिए क्योंकि स्पष्ट और निष्पक्ष विचार ही समाज को आगे बढ़ाते हैं। छुपे हुए स्वार्थ और दोगली सोच समाज के पतन का कारण बनती है। राष्ट्र का उत्थान तभी संभव है जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों को समझे और निभाए। अधिकारों के साथ कर्तव्यों का संतुलन ही सच्चा देशभक्ति का आधार है। संत लहरी सिंह कश्यप कहते है कि गुरु, नेता और प्रशासक की बहुत बड़ी भूमिका होती है गुरुजन ज्ञान से, प्रशासक न्याय से और नेता समुचित दिशा-निर्देशन से समाज को सुमति और सुगति प्रदान करते हैं। यदि ये तीनों अपने दायित्व का निष्ठापूर्वक पालन करें, तो समाज में आध्यात्मिक समुत्थान, समरसता, विचारों में पारदर्शिता और राष्ट्रीय प्रगति में कर्तव्यबोध का सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर होता है। गुरुजन का कार्य व्यक्ति के अंतर्मन को प्रकाशित करना है। प्राचीन काल में आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को केवल शिक्षित ही नहीं किया, अपितु उन्हें सक्षम शासक भी बनाया। महर्षि वशिष्ठ और गुरुदेव विश्वामित्र ने श्रीराम-लक्ष्मण के व्यक्तित्व और सद्गुणों को लोकोपयोगी और परमार्थी बनाया। गुरुजन शिष्य के जीवन में केवल विद्या ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला में नैपुण्य और परमार्थिक दृष्टि प्रदान करते हैं। प्रशासक समाज के वे महत्वपूर्ण अंग हैं, जो न्याय व्यवस्था के अनुरूप जनसामान्य के अधिकारों की. रक्षा करते हैं। यदि प्रशासक शिथिल होगा, तो निश्चित ही समाज निरंकुश होकर अराजकता में लिप्त हो जाएगा। नेतागण समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाले होते हैं। गांधी जी ने अहिंसा और सत्याग्रह के बल पर जनता को स्वतंत्रता संग्राम में संगठित किया। एक सच्चा नेता समर्पित जनसेवक होता है, जो जनता के दुख-सुख में साथ खड़ा रहता है। इन तीनों लोगों की भूमिकाएं भिन्न-भिन्न होते हुए भी समाज के कल्याण में पूरक हैं। गुरु व्यक्ति को आत्मशक्ति प्रदान करते हैं, प्रशासक निष्पक्ष और पारदर्शी अनुशासन द्वारा समाज में सुरक्षित वातावरण निर्मित करते हैं और नेतागण सामूहिक कल्याण की दृष्टि से जनसामान्य को कुशल नेतृत्व प्रदानकर उन्हें देश के श्रेष्ठ नागरिक होने का गौरव प्रदान करते हैं। जब इन तीनों का संतुलित समन्वय होता है, तभी समाज में नैतिक जागरण, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय समुन्नति सुनिश्चित 'और सुदृढ़ होती है। संत लहरी सिंह कश्यप जी ने घूम घूम कर लोगो के आत्मिक विकास पर जनजागरण किया है उनके अनुयायी देश के विभिन्न विभिन्न हिस्सों में उ के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेते है।
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